भारत के प्रधानमंत्री आईएएस ऑफिसर से कितनी बार मिल सकते हैं !

 

क्या भारत के प्रधानमंत्री किसी आईएएस ऑफिसर से मिल सकते हैं कई बार आपके मन में ऐसा प्रश्न जरूर उत्पन्न हुआ होगा क्योंकि आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री के आसपास काम करने वाले जितने भी व्यक्ति होते हैं उसमें अधिकांशत आई ए एस ऑफिसर हीं होते हैं, लेकिन क्या वह उनके आस पास रहकर भी प्रधानमंत्री से कितने  बार मिलते हैं या प्रोटोकॉल के तहत किसी से मिलने की उन्हें इजाजत है  या नहीं !

Protocol एक तरह की औपचारिकता होती है, जो एक सिस्टम को बेहतर चलाने के लिये बनाई जाती है. ये एक तरह की प्रक्रिया है जिसके मुताबिक़ किसी काम को व्यवस्थित तरीक़े से पूरा किया जाता है. भारत में इसे सरकारी संस्कार भी कह सकते हैं. Protocol को Greek शब्द 'प्रोटो-कोलान' से लिया गया है. इसका अर्थ 'पहली गोंद' है, जो किसी दस्तावेज़ को सील करते वक़्त लगाई जाती है. ताकि वो दस्तावेज़ ज़्यादा प्रमाणिक नज़र आएं !

Protocol...यानी औपचारिकताओं और तामझाम से भरा वो सिस्टम, जिसमें भारत में हर क्षेत्र में दो वर्ग पैदा किये हैं. इसके तहत एक वर्ग को ज़रूरत से ज़्यादा अहमियत दी जाती है, जबकि दूसरे वर्ग से ग़ुलाम या सेवक की तरह बर्ताव किया जाता है !

IAS अधिकारी या अन्य सेवाओं के अधिकारी प्रशिक्षण के दौरान एक समूह के रूप में पीएम और अन्य वीआईपी से मिलते हैं। लेकिन वे इन वीआईपी को बाद में व्यक्तिगत आधार पर मिलने और विशेष रूप से बुलाया जाने तक नहीं मिलने वाले हैं।


VIPS उन अधिकारियों को भी हतोत्साहित करती है जो बिना किसी वास्तविक कारण के या बिना बुलाए उनसे मिलने आते हैं।

अपने स्वयं के कर्मचारियों को छोड़कर, किसी अन्य व्यक्ति को पीएम से मिलने की अनुमति नहीं है, जब तक कि अन्यथा किसी कारण से नहीं बुलाया जाता है ! वह भी अपने नियंत्रण प्राधिकरण से अनुमति प्राप्त करने के बाद।


 भारत के प्रधानमंत्री के आसपास   कड़ी सुरक्षा  होता है वे अपनी सुरक्षा घेरे को तोड़कर भी किसी से नहीं मिल सकते हैं या किसी कारण बस ऐसा करना होता है, तो वे प्रोटोकॉल के नियमों  नियमों को तोड़कर ऐसा क्या सकते हैं !

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